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Jaapak
भगवद्गीताअध्याय 4

अध्याय 4: ज्ञानकर्मसंन्यासयोग

Jñāna Karm Sanyās Yog

इस अध्याय में 1 श्लोक हैं।

  1. 4.7
    यदा यदा हि धर्मस्य — धर्म और अवतार का सरल अर्थ

    यदा यदा हि धर्मस्य का अर्थ सिर्फ 'बुरे लोग बढ़ें तो अवतार हो' नहीं है। सृजामि का असली मतलब और धर्म की ग्लानि का रहस्य — गीता 4.7।